IPO अलॉटमेंट कैसे होता है: रिटेल, HNI और SME, और लॉटरी

अपडेट 22 Sep 2026 · Read in English

हर IPO में निवेशकों की हर श्रेणी के लिए शेयरों का एक हिस्सा तय होता है। जब किसी श्रेणी में शेयरों से ज़्यादा बोलियाँ आती हैं, तो रजिस्ट्रार SEBI के नियमों के अनुसार तय करता है कि शेयर किसे मिलेंगे। इसका नतीजा 'बेसिस ऑफ़ अलॉटमेंट' में छपता है।

रिटेल निवेशक (मेनबोर्ड)

रिटेल निवेशक ₹2 लाख तक के लिए आवेदन करते हैं। ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर रजिस्ट्रार पहले देखता है कि कितने आवेदकों को न्यूनतम लॉट दिया जा सकता है, फिर कंप्यूटर से लॉटरी निकालकर उतने आवेदन चुनता है। हर सफल आवेदन को एक लॉट मिलता है। ज़्यादा लॉट के लिए आवेदन करने से चुने जाने की संभावना नहीं बढ़ती।

गैर-संस्थागत निवेशक (मेनबोर्ड)

₹2 लाख से ज़्यादा के आवेदन इस श्रेणी में आते हैं। अप्रैल 2022 से इसके दो हिस्से हैं: एक-तिहाई ₹2 से ₹10 लाख के आवेदनों के लिए और दो-तिहाई ₹10 लाख से ऊपर के आवेदनों के लिए। ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर दोनों में न्यूनतम आवेदन लॉटरी से दिया जाता है।

संस्थागत निवेशक (QIB)

संस्थाओं को उनकी बोली के अनुपात में शेयर मिलते हैं। संस्थागत हिस्से का 60% तक एंकर निवेशकों को इश्यू खुलने से एक कार्य-दिवस पहले दिया जा सकता है।

SME इश्यू

1 जुलाई 2025 से खुलने वाले SME इश्यू में रिटेल श्रेणी की जगह 'व्यक्तिगत निवेशक' श्रेणी है, जिसका न्यूनतम आवेदन दो लॉट (₹2 लाख से ज़्यादा) का है। ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर सफल आवेदन लॉटरी से चुने जाते हैं।

संभावना कैसे निकालें

लॉटरी वाली श्रेणी में न्यूनतम अलॉटमेंट मिलने की संभावना = उस श्रेणी में कितने न्यूनतम आवेदन भरे जा सकते हैं ÷ कुल आवेदन। newboard के सब्सक्रिप्शन पेज हर इश्यू के लिए यह हिसाब दिखाते हैं। '1 ÷ कितने गुना सब्सक्राइब' वाला आसान तरीका शेयर गिनता है, आवेदन नहीं, इसलिए संभावना कम दिखाता है।

आवेदन किन कारणों से रद्द होता है

  • एक ही PAN से एक ही श्रेणी में एक से ज़्यादा आवेदन।
  • PAN, DP ID या क्लाइंट ID का डिपॉज़िटरी रिकॉर्ड से मेल न खाना।
  • बोली के आखिरी दिन कट-ऑफ़ समय तक UPI मैंडेट स्वीकार न करना।

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